नई दिल्ली टीवी न्यूज़ की दुनिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में चर्चित टीवी एंकर चित्रा त्रिपाठी कोर्ट परिसर के बाहर एक युवक के साथ तीखी बहस करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आते ही पत्रकारिता की भाषा, संयम और सार्वजनिक आचरण को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक हाथ में माइक लेकर चित्रा त्रिपाठी से सवाल करता है और उन पर एक पुराने मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाता है। बातचीत कुछ ही पलों में बहस में बदल जाती है और माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। इसी दौरान कथित तौर पर चित्रा त्रिपाठी का लहजा बेहद सख्त नजर आता है और “एक झापड़ दूंगी” जैसा वाक्य भी सुनाई देता है, जिसके बाद विवाद और बढ़ जाता है।
कैमरे के सामने आरोप-प्रत्यारोप
वायरल क्लिप में युवक कैमरे की ओर इशारा करते हुए “गुंडागर्दी” का आरोप लगाता है और कुछ संतों के नाम लेकर दावा करता है कि उन्हें भी मीडिया के माध्यम से बदनाम किया गया। वीडियो में माइक को लेकर भी तनातनी होती दिखती है, जहां चित्रा त्रिपाठी युवक से माइक छोड़ने को कहती हैं, जबकि युवक इसके लिए मना करता है।
नया विवाद या पुराना वीडियो?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वीडियो हालिया है या पुराना। सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स इसे ताजा घटना बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि यह वीडियो पहले का है, जिसे अब दोबारा वायरल किया जा रहा है। फिलहाल इसकी पुष्टि किसी आधिकारिक स्रोत से नहीं हो सकी है।
सोशल मीडिया दो खेमों में बंटा
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक वर्ग चित्रा त्रिपाठी की आलोचना करते हुए इसे टीवी पत्रकारिता के गिरते स्तर का उदाहरण बता रहा है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि लगातार उकसाए जाने की वजह से उनका संयम टूट गया और ऐसी प्रतिक्रिया सामने आई।
अब भी चुप्पी
विवाद बढ़ने के बावजूद अभी तक न तो चित्रा त्रिपाठी और न ही उनके चैनल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में अटकलों और बहसों का दौर जारी है।
बड़ा सवाल बरकरार
यह वीडियो एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या बहस और टीआरपी की दौड़ में टीवी न्यूज़ अपने मूल उद्देश्य—सूचना और संतुलन—से दूर होती जा रही है? या फिर यह सिर्फ एक अधूरा वीडियो है, जिसकी सच्चाई सामने आना अभी बाकी है?
फिलहाल, सोशल मीडिया की अदालत में यह मामला गरमाया हुआ है और पत्रकारिता की मर्यादा पर सवाल एक बार फिर केंद्र में हैं।