मशहूर संगीतकार एआर रहमान के हालिया बयान ने फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। रहमान ने एक इंटरव्यू में इशारों-इशारों में कहा था कि बीते कुछ वर्षों से उन्हें पहले की तुलना में कम काम मिल रहा है और इसके पीछे इंडस्ट्री में आए “पावर शिफ्ट” के साथ-साथ कुछ हद तक “कम्युनल सोच” भी जिम्मेदार हो सकती है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
इसी बीच भजन सम्राट अनूप जलोटा का बयान सामने आया है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है। न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में अनूप जलोटा ने एआर रहमान को लेकर एक चौंकाने वाली सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि यदि रहमान को यह लगता है कि मुस्लिम होने के कारण उन्हें फिल्मों में संगीत देने के अवसर नहीं मिल रहे हैं, तो उन्हें अपने पुराने धर्म को अपनाने पर विचार करना चाहिए।
अनूप जलोटा ने रहमान के जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि एआर रहमान पहले हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया। इसके बावजूद उन्होंने संगीत की दुनिया में जबरदस्त पहचान बनाई, अपार सफलता हासिल की और करोड़ों दिलों में जगह बनाई। लेकिन अगर आज उन्हें यह महसूस हो रहा है कि धर्म उनके करियर में बाधा बन रहा है, तो उन्हें फिर से हिंदू धर्म अपनाकर देखना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अगर रहमान को इस बात पर यकीन है कि हिंदू होने से उन्हें ज्यादा काम मिल सकता है, तो उन्हें यह प्रयोग करके देखना चाहिए। अनूप जलोटा के मुताबिक, इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या वाकई धर्म की वजह से उनके करियर पर असर पड़ा है या नहीं।
गौरतलब है कि एआर रहमान ने अपने इंटरव्यू में सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं लगाया था, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा था कि पिछले आठ सालों में फिल्म इंडस्ट्री में फैसले लेने की प्रक्रिया बदल गई है, जहां रचनात्मक लोगों की जगह गैर-रचनात्मक लोग निर्णायक भूमिका में आ गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह बदलाव कहीं न कहीं साम्प्रदायिक सोच से जुड़ा हो सकता है।
अनूप जलोटा की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर कला, धर्म और अवसरों को लेकर बहस तेज हो गई है।