माघ मेला विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार को भेजा कानूनी नोटिस, 24 घंटे का समय तय

माघ मेला विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार को भेजा कानूनी नोटिस, 24 घंटे का समय तय

ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से योगी आदित्यनाथ सरकार को विधिक नोटिस जारी किया है, जिसमें माघ मेला प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि 19 जनवरी को जारी किया गया प्रशासनिक नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस नहीं लिया गया, तो राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना सहित अन्य कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का आरोप

कानूनी नोटिस में यह आरोप लगाया गया है कि प्रशासन की कार्रवाई से शंकराचार्य की प्रतिष्ठा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिस मुद्दे को लेकर माघ मेला प्रशासन ने सवाल उठाए हैं, वह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में प्रशासन द्वारा अलग से नोटिस जारी करना, न्यायिक प्रक्रिया और अदालत की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाने जैसा है।

सुप्रीम कोर्ट से जुड़े पुराने विवाद का हवाला

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुरी स्थित गोवर्धन मठ से जुड़े शंकराचार्य की ओर से कथित रूप से एक जाली आवेदन दाखिल किया गया था। इसी आवेदन के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में यह आग्रह किया गया कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की नियुक्ति को स्वीकार न किया जाए।

हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश उनके लिए व्यावहारिक रूप से प्रभावहीन रहा, क्योंकि उनका अभिषेक पहले ही संपन्न हो चुका था।

पहले भी अदालत का रुख कर चुके हैं अविमुक्तेश्वरानंद

यह पहला मौका नहीं है जब यह मामला अदालत तक पहुंचा हो। 9 मार्च 2024 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर वासुदेवानंद सरस्वती पर झूठे हलफनामे देने का आरोप लगाया था।

याचिका में कहा गया था कि गलत तथ्यों के आधार पर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया।

माघ मेले की घटना से बढ़ा विवाद

मौजूदा विवाद की जड़ मौनी अमावस्या के दिन की घटना मानी जा रही है।

माघ मेले के दौरान प्रशासन ने शंकराचार्य के समर्थकों को स्नान से रोक दिया था, जिसके बाद पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हुई। इसके बाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर यह सवाल उठाया था कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ पदवी का उपयोग क्यों कर रहे हैं।

8 पन्नों का विस्तृत नोटिस

पूरे घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से करीब आठ पन्नों का विस्तृत कानूनी नोटिस भेजा गया है। इसमें माघ मेला प्रशासन की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण, एकतरफा और नियमों के विरुद्ध बताया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि योगी सरकार और प्रशासन इस नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं।