प्रयागराज। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कथित रूप से संगम में स्नान से रोके जाने के मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए भाजपा सरकार पर एक संत के अपमान का आरोप लगाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यदि प्रधानमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते और हिंदुओं से माफी नहीं मांगते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे ‘सनातनी’ नहीं बल्कि ‘धनातनी’ हैं। उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि भाजपा शासन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है, लेकिन एक शंकराचार्य के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अपराध केवल इतना है कि वे सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं, आधे-अधूरे मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर सवाल उठाते हैं, महाकुंभ की व्यवस्थाओं पर टिप्पणी करते हैं और कोविड काल के दौरान गंगा में बहती लाशों का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी पिछले 12 वर्षों से सत्ता में हैं, और जिनकी वजह से वे सत्ता में हैं, उन्हीं संतों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “सच्चाई यही है कि नरेंद्र मोदी न काम के हैं, न राम के हैं।” उन्होंने माघ मेले की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शाही स्नान की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे न अंग्रेजों ने रोका और न ही मुगलों ने, लेकिन मौजूदा सरकार इसमें बाधा डाल रही है।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म की आड़ में लोगों को गुमराह करती है और केवल अमीरों के हितों का ध्यान रखती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस पूरे मामले में सामने आकर हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा उन्हें स्वयं को सनातनी कहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री हिंदुओं से माफी मांगेंगे?
गौरतलब है कि बीते रविवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके समर्थकों को संगम जाने से कथित रूप से रोके जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि विरोध करने पर उनके कुछ समर्थकों के साथ मारपीट भी की गई। वहीं पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य बिना अनुमति के 200 से 250 समर्थकों के साथ पुल नंबर दो पर लगे बैरिकेड को तोड़ते हुए स्नान घाट की ओर बढ़ रहे थे, जिसके बाद उन्हें रोका गया।