बॉलीवुड ने युवाओं के दिमाग में कचरा भरा. 'आश्रम' वेब सीरीज और स्टार्स पर भड़के कथावाचक, दिया करारा जवाब

बॉलीवुड ने युवाओं के दिमाग में कचरा भरा. 'आश्रम' वेब सीरीज और स्टार्स पर भड़के कथावाचक, दिया करारा जवाब

वृंदावन: अनिरुद्ध आचार्य के कथा पंडाल में उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब हरियाणवी और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री की जानी-मानी कलाकार श्वेता चौहान ने व्यास पीठ से तीखे सवाल पूछे। एक्ट्रेस, जो ‘सैल्यूट तिरंगा’ संगठन की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, ने युवाओं में घटते राष्ट्रवाद और बढ़ते मांसाहार पर चिंता जताई। इस पर अनिरुद्ध आचार्य ने जो जवाब दिया, वह अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

“इंग्लैंड की संस्कृति से प्रेम, ऋषियों से अनजान”

श्वेता चौहान ने सवाल किया कि युवाओं में सनातन धर्म और राष्ट्रवाद की भावना कैसे जगाई जाए। इस पर गुरु जी ने बेबाक अंदाज़ में कहा कि आज का युवा राष्ट्रवाद की बातें तो करता है, लेकिन अपने इतिहास को नहीं जानता।

उन्होंने कहा,
“आज के युवाओं को इंग्लैंड की संस्कृति और लिव-इन रिलेशनशिप से प्रेम है, लेकिन वे यह नहीं जानते कि दुनिया में प्लास्टिक सर्जरी का आविष्कार सबसे पहले महर्षि सुश्रुत ने किया था। जब दुनिया के पास सैटेलाइट नहीं थे, तब हमारे ऋषि-मुनि सूर्य और चंद्रमा की गति जानते थे। जब युवा अपनी जड़ों और ऋषियों के विज्ञान को समझेंगे, तब राष्ट्रप्रेम अपने आप जागेगा।”

बॉलीवुड पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: गुटखा बेचने वाले कैसे बन गए हीरो?

बातचीत के दौरान गुरु जी ने बॉलीवुड और मीडिया के एक वर्ग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बॉलीवुड युवाओं के दिमाग में कचरा भर रहा है।

उन्होंने कहा,
“‘आश्रम’ जैसी फिल्में बनाकर संतों के प्रति नफरत पैदा की जा रही है। इनका उद्देश्य है कि युवा संतों से घृणा करें और नशे की ओर जाएँ।”

‘सितारों’ की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा,
“जो लोग गुटखा, शराब बेच रहे हैं और जुआ खिलवा रहे हैं, उन्हें आज का मीडिया ‘सितारे’ कहता है। जबकि जो संत समाज को नशा छोड़ने और माता-पिता की सेवा का मार्ग दिखाते हैं, उन्हें ढोंगी कहा जाता है। असली सितारे वे हैं जो सही दिशा दिखाते हैं, न कि वे जो ‘दाने-दाने में केसर’ बेच रहे हैं।”


 

मांसाहार छोड़ने का अचूक ‘हथौड़ा’ मंत्र

जब एक्ट्रेस श्वेता चौहान ने पशु-प्रेम का हवाला देते हुए पूछा कि लोग कथा सुनने के बाद भी नॉनवेज खाना क्यों नहीं छोड़ते, तो गुरु जी ने ‘पत्थर और हथौड़े’ का सुंदर उदाहरण दिया।

उन्होंने समझाया,
“जैसे पत्थर एक चोट में नहीं टूटता, उसे तोड़ने के लिए 100वीं चोट की ज़रूरत होती है, वैसे ही सत्संग होता है। आप मांसाहार करते हुए भी सत्संग सुनते रहिए। एक दिन सत्संग रूपी हथौड़े की चोट से आपके भीतर आत्मग्लानि जागेगी और आप स्वयं गलत आदतें छोड़ देंगे।”