पोंगल पर 'धर्म' का रंग: क्या हिंदू परंपरा से त्योहार को अलग कर रहे हैं CM स्टालिन? तमिलनाडु में सियासी घमासान तेज

पोंगल पर 'धर्म' का रंग: क्या हिंदू परंपरा से त्योहार को अलग कर रहे हैं CM स्टालिन? तमिलनाडु में सियासी घमासान तेज

चेन्नई: तमिलनाडु में मकर संक्रांति यानी 'पोंगल' के जश्न के बीच एक तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एआईएडीएमके (AIADMK) ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी द्रमुक (DMK) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत पोंगल को हिंदू धर्म और उसकी मान्यताओं से अलग करने की कोशिश कर रही है।

इस मुद्दे ने अब एक बड़े सियासी बवाल का रूप ले लिया है, जिसमें दोनों प्रमुख विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की जड़ DMK सरकार का वह रवैया है, जिसे विपक्ष 'हिंदू विरोधी' बताता है। बीजेपी और एआईएडीएमके का आरोप है कि मुख्यमंत्री स्टालिन पोंगल को केवल 'तमिलर थिरुनल' (तमिल का त्योहार) के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, जबकि इसके धार्मिक पहलुओं—जैसे सूर्य देव की पूजा, गो-पूजन और मंदिरों की परंपराओं—को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है।

विपक्ष का दावा है कि सरकारी शुभकामना संदेशों और विज्ञापनों से हिंदू प्रतीकों (विभूति, तिलक, देवताओं के चित्र) को हटाया जा रहा है ताकि इसे एक "धर्मनिरपेक्ष" या "नास्तिक" त्योहार के रूप में स्थापित किया जा सके।

बीजेपी का तीखा हमला: 'सनातन से नफरत क्यों?'

तमिलनाडु बीजेपी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पोंगल मूल रूप से सूर्य नारायण की उपासना का पर्व है।

 बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब पोंगल पर पूजा-पाठ और मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, तो सरकार इसे हिंदू धर्म से काटकर क्यों पेश कर रही है?

 पार्टी ने चेतावनी दी है कि तमिल संस्कृति और सनातन धर्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और उन्हें अलग करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

AIADMK की चेतावनी: 'परंपराओं से खिलवाड़ न करें स्टालिन'

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके ने भी सुर में सुर मिलाया है। पार्टी महासचिव ई.के. पलानीस्वामी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पोंगल सदियों से आस्था का विषय रहा है।

 एआईएडीएमके का कहना है कि "द्रविड़ मॉडल" के नाम पर लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है।

 उन्होंने कहा कि जनता देख रही है कि कैसे एक पारंपरिक त्योहार का राजनीतिकरण किया जा रहा है।

DMK का बचाव: 'यह जाति-धर्म से ऊपर, किसानों का त्योहार है'

इस पूरे विवाद पर सत्ताधारी DMK और उनके समर्थकों का अलग तर्क है।

सरकार का मानना है कि पोंगल प्रकृति और किसानों के धन्यवाद का त्योहार है।

  DMK नेताओं का कहना है कि वे इसे किसी एक धर्म तक सीमित रखने के बजाय 'समस्त तमिल समुदाय' (Tamilar Thirunal) के उत्सव के रूप में मनाते हैं, जिसमें सभी धर्मों के तमिल लोग शामिल हो सकें।

राजनीतिक मायने

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल त्योहार तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु में बीजेपी लगातार 'हिंदुत्व और तमिल संस्कृति' के संगम पर जोर दे रही है, जबकि DMK अपनी 'द्रविड़ विचारधारा' (जो वेदों और सनातन परंपराओं का विरोध करती रही है) पर कायम है। पोंगल का यह विवाद 2026 विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े वैचारिक युद्ध का

संकेत दे रहा है।