देवरिया , उत्तर प्रदेश में लव जिहाद कब रुकेगा ?

देवरिया , उत्तर प्रदेश में लव जिहाद कब रुकेगा ?

उत्तर प्रदेश (देवरिया): उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से पिछले दिनों सामने आए कथित 'लव जिहाद' और नाबालिग के यौन शोषण का  मामल अया है। प्रसिद्ध कथावाचक संत अनिरुद्धाचार्य महाराज के पंडाल से उजागर हुई यह घटना अब पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक बयानों के बाद बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आशिक अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

सत्संग पंडाल में हुआ था चौंकाने वाला खुलासा

यह पूरा मामला पिछले महीने देवरिया में आयोजित कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की भागवत कथा के दौरान उजागर हुआ था। कथा समाप्ति के बाद जब गुरुजी श्रद्धालुओं की समस्याएं सुन रहे थे, तभी बरियारपुर इलाके के भरौटा गांव की रहने वाली एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की ने गुरुजी के सामने अपनी जो आपबीती सुनाई, उसने पूरे पंडाल को झकझोर कर रख दिया।

लड़की ने स्वीकार किया कि जब वह महज 14 वर्ष की थी, तब स्कूल आते-जाते समय उसी के साथ पढ़ने वाले 18 वर्षीय मुस्लिम युवक आशिक अंसारी ने दोस्ती के बहाने उसे अपने जाल में फंसाया। आरोपी ने हिंदू लड़की को पूरी तरह अपने वश में करने के लिए एक मंदिर में ले जाकर विवाह का ढोंग रचाया और शादी का झांसा देकर कई महीनों तक उसका लगातार शारीरिक व यौन शोषण किया।

आर्थिक शोषण और ब्लैकमेलिंग का खेल

पीड़िता के बयानों के अनुसार, आरोपी आशिक अंसारी का मकसद सिर्फ शारीरिक शोषण तक सीमित नहीं था। उसने लड़की का माइंडवॉश करके और डरा-धमकाकर उसकी माँ की अलमारी में रखे ₹29,000 नगद चोरी करवाए। इसके अलावा लड़की ने उसे ₹10,000 का एक मोबाइल फोन और अपनी साइकिल भी दे दी थी। पीड़िता ने बताया कि जब भी वह पैसे देने में आनाकानी करती थी, तो आशिक अंसारी उसके साथ बर्बरता से मारपीट करता था। इस मानसिक तनाव के चलते पीड़िता अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे सकी और हाईस्कूल की परीक्षा में फेल हो गई।

काम निकल जाने पर छोड़ा, कई अन्य लड़कियां भी निशाने पर

पीड़िता का आरोप है कि पूरी तरह शोषण करने के बाद आरोपी का व्यवहार अचानक बदल गया। वह लड़की को बेसहारा छोड़कर काम के बहाने गुजरात भाग गया और बातचीत बंद कर दी। जब लड़की ने उससे संपर्क किया तो उसने साफ कह दिया, "तुम अपने रास्ते, मैं अपने रास्ते।"

मंच पर बातचीत के दौरान यह बात भी सामने आई कि आशिक अंसारी का एजेंडा केवल इसी लड़की तक सीमित नहीं था। पीड़िता ने दावा किया कि उसके पहले भी आरोपी ने एक अन्य हिंदू लड़की को फंसाया था और बाद में उसे भी छोड़ दिया। पीड़िता के अनुसार, उनके प्राइवेट स्कूल की कई अन्य सहेलियां और छात्राएं भी इसी तरह के जाल में फंसी हुई हैं।

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य और बीजेपी विधायक का कड़ा रुख

इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक मोड़ ले लिया। कथा के दौरान संत अनिरुद्धाचार्य ने इसे 'लव जिहाद' का एक सुनियोजित स्कैम और 'मीठा बलात्कार' करार देते हुए बेटियों को जागरूक रहने की सलाह दी थी।

वीडियो सामने आते ही स्थानीय बीजेपी विधायक और प्रखर नेता शलभ मणि त्रिपाठी इस मामले में कूद पड़े। उन्होंने आरोपी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग उठाई। शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, "जो भी चरमपंथी और कट्टरपंथी इस प्रकार से हमारी हिंदू बहन-बेटियों को निशाना बना रहे हैं, उनके विरुद्ध ऐसी कठोरतम कार्रवाई की जाए जो एक नजीर बने, ताकि आगे चलकर कोई भी लव जिहादी हमारी बेटियों की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत न कर सके।" उन्होंने पुलिस से आरोपी के अन्य साथियों और मददगारों का भी पता लगाने की मांग की है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: आरोपी गया जेल

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बरियारपुर थाना पुलिस ने पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया। पुलिस प्रशासन के अनुसार, आरोपी आशिक अंसारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) (बलात्कार) तथा 3/4 पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया, क्योंकि पीड़िता घटना के समय और वर्तमान में नाबालिग है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश सुरक्षित कर दिया।

स्कूल प्रशासन ने दावों पर दी सफाई

कथा के दौरान पीड़िता ने दावा किया था कि वह बरियारपुर इलाके के जिस प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है, वहां मुस्लिम छात्रों की तादाद बहुत ज्यादा है और वे हिंदू लड़कियों को परेशान करते हैं। इस दावे पर स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने आधिकारिक सफाई पेश की है। प्रधानाचार्य ने कहा, "यह एक शिक्षण संस्थान है जहां सभी धर्म, संप्रदाय और वर्ग के बच्चे समान रूप से अध्ययन करते हैं। यह कहना कि यहाँ किसी एक विशेष समुदाय के छात्रों की तादाद अत्यधिक ज्यादा है, सरासर गलत और निराधार है। विद्यालय परिसर में पूर्ण अनुशासन बनाए रखा जाता है।"