बांग्लादेश की घटनाओं से लेकर गुरु-शिष्य परंपरा तक, कथावाचक का तीखा और भावुक संदेश

बांग्लादेश की घटनाओं से लेकर गुरु-शिष्य परंपरा तक, कथावाचक का तीखा और भावुक संदेश

गोंदिया।

प्रसिद्ध कथावाचक और समाजसेवी संत ने हालिया प्रवचन के दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं, धर्मांतरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और गुरु-शिष्य परंपरा पर गंभीर और भावुक टिप्पणी की। उनके वक्तव्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बांग्लादेश की घटनाओं पर चिंता

अपने संबोधन की शुरुआत में कथावाचक ने बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं और बच्चियों के साथ हुई कथित घटनाओं का उल्लेख करते हुए गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वहां पढ़े-लिखे लोग भी विस्फोटक सामग्री जैसे आरडीएक्स ला रहे हैं और पीड़ित हिंदू परिवारों में भय का माहौल है।

उन्होंने हाल की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि एक विधवा महिला को पेड़ से बांधकर कई लोगों द्वारा दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक नौ वर्षीय बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की बात सामने आई थी।

कथावाचक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों, बच्चों, जमीन और सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करना है।

सेवा कार्य और धर्मांतरण पर बयान

उन्होंने कहा कि कथाओं और प्रवचनों से प्राप्त धन का उपयोग अस्पताल बनाने में किया जाता है, ताकि गरीबों को इलाज के नाम पर धर्मांतरण के लिए मजबूर न किया जाए।

उन्होंने कहा, “हम सेवा के नाम पर धर्मांतरण नहीं चाहते। जरूरत पड़े तो अपनी किडनी बेच देंगे, लेकिन इलाज अपने अस्पताल में करवाएंगे।”

मंदिर निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही हजारों करोड़ रुपये के मंदिर हैं, लेकिन इसके बावजूद हिंदुओं का धर्मांतरण रुक नहीं पा रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिरों में आने वाले दान का उपयोग गरीब हिंदू बेटियों के विवाह और सामाजिक उत्थान में होना चाहिए।

सामूहिक विवाह की जानकारी

कथावाचक ने 15 फरवरी को गोंदिया क्षेत्र में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन में लगभग 300 बेटियों का विवाह कराया जाएगा, जिनमें बड़ी संख्या अनाथ और आदिवासी बेटियों की होगी।

उन्होंने बताया कि यह आयोजन पिछले सात वर्षों से लगातार किया जा रहा है और इस वर्ष वे 1675 बेटियों के धर्मपिता बनेंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सहायता दिखावे के लिए नहीं, बल्कि समाज में उदाहरण प्रस्तुत करने के उद्देश्य से की जाती है।

गुरु-शिष्य परंपरा पर संदेश

प्रवचन के दूसरे भाग में कथावाचक ने गुरु-शिष्य संबंधों पर बात करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को गुरु चुनते समय अत्यंत सावधान रहना चाहिए। उन्होंने कहा,

“पानी पीजिए छानकर और गुरु बनाइए जानकर।”

हनुमान जी और कालनेमि की कथा का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे असली और नकली गुरु की पहचान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी गुरु एक जैसे नहीं होते और अंधी आस्था व्यक्ति को नुकसान पहुँचा सकती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

कथावाचक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थक इसे सामाजिक चेतना और सेवा भाव से जुड़ा संदेश बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे तीखा और विवादास्पद भी मान रहे हैं।

हालांकि, कथावाचक ने अपने संदेश में बार-बार यह दोहराया कि उनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना, सेवा को प्राथमिकता देना और आस्था को विवेक के साथ जोड़ना है।