अनिरुद्ध आचार्य का दावा: आसाराम बापू के खिलाफ रची गई थी गहरी साजिश

अनिरुद्ध आचार्य का दावा: आसाराम बापू के खिलाफ रची गई थी गहरी साजिश

कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य ने भागवत कथा के अंतिम दिन एक विशेष संबोधन में संत श्री आसारामजी बापू के समर्थन में बयान देते हुए उनके खिलाफ “गहरी साजिश” रचे जाने का दावा किया। अनिरुद्ध आचार्य ने कहा कि यह बात वह लंबे समय से अपने मन में रखे हुए थे, जिसे अब भक्तों और समाज के सामने रखना जरूरी समझा।

भागवत कथा के दौरान अनिरुद्ध आचार्य ने कहा कि राष्ट्र और सनातन धर्म के हित में सच बोलना आवश्यक है, ताकि सनातनी समाज जाग सके। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि हिंदुओं के हित की बात खुलकर की जानी चाहिए।

मीडिया पर लगाए आरोप

अनिरुद्ध आचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है, जहां इलेक्ट्रॉनिक और स्ट्रीम मीडिया द्वारा साधु-संतों के खिलाफ फैलाई जा रही कथित गलत जानकारियां सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा नहीं था और उस समय साधु-संतों के पास अपनी बात रखने के पर्याप्त माध्यम नहीं थे।

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आसाराम बापू को लेकर क्या कहा

अनिरुद्ध आचार्य ने दावा किया कि जब संत श्री बापू आशाराम जी पर आरोप लगे, उस समय सोशल मीडिया का प्रभाव नहीं था, इसलिए मुख्यधारा मीडिया की खबरों को ही अंतिम सत्य मान लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय सोशल मीडिया होता, तो आरोप लगाने वाले पक्ष की बात के साथ-साथ अन्य पहलू भी सामने आते।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आसाराम बापू को फंसाने में कथित तौर पर धर्मांतरण से जुड़े लोगों की भूमिका रही है। अनिरुद्ध आचार्य का कहना था कि आसाराम बापू ने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण का विरोध किया और लाखों हिंदुओं की घर वापसी कराई, जिससे कुछ वर्गों में असंतोष पैदा हुआ।

अन्य उदाहरणों का भी दिया जिक्र

अनिरुद्ध आचार्य ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किस तरह कथित तौर पर मीडिया द्वारा संत प्रेमानंद महाराज और अभिनेता धर्मेंद्र को लेकर गलत खबरें चलाई गईं। उन्होंने दावा किया कि उनके स्वयं के मामले में भी एफआईआर दर्ज न होने के बावजूद एफआईआर होने की खबरें चलाई गईं।

हिंदू संतों को किया सतर्क

कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि हिंदू संतों को इस तरह की कथित साजिशों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने संत श्री आसारामजी बापू के मामले को उदाहरण बताते हुए कहा कि समाज को हर खबर पर आंख मूंदकर विश्वास करने के बजाय तथ्यों को समझना चाहिए।

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